भारतीय पायलट अभिनंदन को पाकिस्तान जेनेवा संधि के तहत रिहा करेगा
एयरफोर्स (Indian Airforce) की तरफ से कहा गया कि विंग कमांडर अभिनंदन (Abhinandan) को रिहा करने का पाकिस्तान (Pakistan) का कदम जिनेवा संधि (Geneva Convention) के तहत किया गया है.
नई दिल्ली:
पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) के बाद भारत-पाकिस्तान (India-Pakistan) के में जारी तनाव के बीच तीनों सेनाओं (Air Force, Indian Army Navy) ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की. एयरफोर्स (Indian Airforce) की तरफ से कहा गया कि विंग कमांडर अभिनंदन (Abhinandan) को रिहा करने का पाकिस्तान (Pakistan) का कदम जिनेवा संधि (Geneva Convention) के तहत किया गया है. बता दें कि इससे पहले आज ही पाक पीएम इनरान खान (Imran Khan) ने विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान (Abhinandan Varthaman ) को रिहा करने का फैसला किया है. इमरान खान ने पाक संसद में कहा कि भारतीय पायलट को शुक्रवार को रिहा किया जाएगा. तीनों सेनाओं की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर-वाइस मार्शल आरजीके कपूर ने कहा, 'जहां तक वायुसेना का संबंध है, हम खुश हैं कि हमारा पायलट जो पाकिस्तान की हिरासत में है लौट रहा है, लेकिन हम इसे जेनेवा कन्वेंशन के तहत देखते हैं.
इमरान खान (Imran Khan) ने कहा कि पाकिस्तान कल भारतीय पायलट अभिनंदन वर्धमान (Abhinandan Varthaman) को रिहा करेगा. इमरान खान ने कहा कि शांति के कदम के तौर पर पायलट की रिहाई का कदम उठाया गया है. इमरान खान ने कहा, 'मैं घोषणा करता हूं कि बातचीत शुरू करने के लिए पहले कदम के तौर पर, पाकिस्तान हिरासत में लिए गए भारतीय वायुसेना के अधिकारी को कल (शुक्रवार) रिहा कर रहा है.' पाकिस्तानी सांसदों ने मेजें थपथपा कर उनकी इस घोषणा का स्वागत किया. इमरान खान ने कहा कि हमारी कार्रवाई का एकमात्र मकसद हमारी क्षमता और इच्छा का प्रदर्शन करना था. हम भारत में कोई नुकसान नहीं चाहते थे, क्योंकि हम जिम्मेदार तरीके से कार्य करना चाहते हैं.
Geneva Convention: क्या है जेनेवा संधि?
जेनेवा संधि के अनुसार युद्धबंदियों (POW) के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार नहीं होना चाहिए. उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए. साथ ही सैनिकों को कानूनी सुविधा भी मुहैया करानी होगी. जेनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता. इसके अलावा उन्हें अपमानित नहीं किया जा सकता. इस संधि के मुताबिक युद्धबंदियों (POW) पर मुकदमा चलाया जा सकता है. इसके अलावा युद्ध के बाद युद्धबंदियों को वापस लैटाना होता है. कोई भी देश युद्धबंदियों को लेकर जनता में उत्सुकता पैदा नहीं कर सकता. युद्धबंदियों से सिर्फ उनके नाम, सैन्य पद, नंबर और यूनिट के बारे में पूछा जा सकता है.
जेनेवा संधि के अनुसार युद्धबंदियों (POW) के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार नहीं होना चाहिए. उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए. साथ ही सैनिकों को कानूनी सुविधा भी मुहैया करानी होगी. जेनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता. इसके अलावा उन्हें अपमानित नहीं किया जा सकता. इस संधि के मुताबिक युद्धबंदियों (POW) पर मुकदमा चलाया जा सकता है. इसके अलावा युद्ध के बाद युद्धबंदियों को वापस लैटाना होता है. कोई भी देश युद्धबंदियों को लेकर जनता में उत्सुकता पैदा नहीं कर सकता. युद्धबंदियों से सिर्फ उनके नाम, सैन्य पद, नंबर और यूनिट के बारे में पूछा जा सकता है.
जेनेवा संधि से जुड़ी मुख्य बातें (Geneva Convention Rules)
टिप्पणियां
- इस संधि के तहत घायल सैनिक की उचित देखरेख की जाती है.
- संधि के तहत उन्हें खाना पीना और जरूरत की सभी चीजें दी जाती है.
- इस संधि के मुताबिक किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता.
- किसी देश का सैनिक जैसे ही पकड़ा जाता है उस पर ये संधि लागू होती है. (फिर चाहे वह स्त्री हो या पुरुष)
-संधि के मुताबिक युद्धबंदी को डराया-धमकाया नहीं जा सकता.
- युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जाता
- संधि के तहत उन्हें खाना पीना और जरूरत की सभी चीजें दी जाती है.
- इस संधि के मुताबिक किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता.
- किसी देश का सैनिक जैसे ही पकड़ा जाता है उस पर ये संधि लागू होती है. (फिर चाहे वह स्त्री हो या पुरुष)
-संधि के मुताबिक युद्धबंदी को डराया-धमकाया नहीं जा सकता.
- युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जाता
जेनेवा संधि के अनुसार युद्धबंदियों (POW) के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार नहीं होना चाहिए. उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए. साथ ही सैनिकों को कानूनी सुविधा भी मुहैया करानी होगी. जेनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता. इसके अलावा उन्हें अपमानित नहीं किया जा सकता. इस संधि के मुताबिक युद्धबंदियों (POW) पर मुकदमा चलाया जा सकता है. इसके अलावा युद्ध के बाद युद्धबंदियों को वापस लैटाना होता है. कोई भी देश युद्धबंदियों को लेकर जनता में उत्सुकता पैदा नहीं कर सकता. युद्धबंदियों से सिर्फ उनके नाम, सैन्य पद, नंबर और यूनिट के बारे में पूछा जा सकता है.

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